श्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी जी


नरेंद्र मोदी हमारे देश के वर्तमान प्रधानमंत्री हैं। 2014 के चुनावों में उन्होंने भाजपा (B.J.P) को पूर्ण बहुमत से जितवाया। आज मोदी जी ने अपने व्यक्तित्व से बच्चे बच्चे में देश के प्रति कुछ कर गुज़रने की भावना उत्पन्न की है। Narendra Modi का जीवन बहुत ही साधारण तरीके से शुरू हुआ मगर अपनी मेहनत से उन्होंने असाधारण सफलता हासिल की।
भारत की आज़ादी के तीन वर्ष बाद गुजरात (Gujarat) के एक छोटे से कस्बे, वड़नगर (Vadnagar) में नरेंद्र मोदी का जन्म हुआ। दामोदर दास मोदी और हीरा बा की 6 संतानों में से मोदी उनकी तीसरी संतान थे। उनका परिवार बहुत ग़रीब था और एक कच्चे मकान में रहता था। दो वक्त की रोटी भी बड़ी मुश्किल से मिलती थी। नरेंद्र मोदी की माँ आस पड़ोस में बर्तन साफ करती थी ताकि अपने बच्चों का पालन पोषण कर सके। उनके पिता रेलवे स्टेशन पर चाय की एक छोटी सी दुकान (Tea Stall on Railway Station) चलाते थे। मोदी बचपन में अपने पिता की चाय की दुकान में उनका हाथ बटाते थे और रेल के डिब्बों में चाय बेचते थे। इन संघर्ष भरे दिनों का मोदी पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा।
दुकान संभालने के साथ साथ मोदी पढ़ाई लिखाई का भी पूरा ध्यान रखते थे। मोदी को पढ़ने का बहुत शौक था। वे अक्सर अपने स्कूल के पुस्तकालय में घंटों बिता दिया करते थे। उनके सहपाठी (Classmate) और शिक्षक बताते हैं कि मोदी शुरू से ही एक कुशल वक्ता (Excellent speaker) थे और उनमें नेतृत्व करने की अद्भुत क्षमता थी। वे नाटकों और भाषणों में जमकर हिस्सा लेते थे। नरेंद्र को खेलों में भी बहुत दिलचस्पी थी। मोदी हिन्दू और मुस्लिम दोनों के त्यौहार बराबर उत्साह से मनाते थे। मोदी बचपन से ही बहुत बहादुर (Brave) थे। एक बार वे एक मगर के बच्चे को हाथ में उठाकर घर ले आए थे। ऐसे थे हमारे छोटे नरेंद्र।

बचपन से ही मोदी में देश भक्ति (Patriotism) कूट कूट कर भरी थी। 1962 में भारत चीन युद्ध के दौरान मोदी रेलवे स्टेशन पर जवानों से भरी ट्रेन में उनके लिए खाना और चाय लेकर जाते थे। 1965 में भारत पाक युद्ध के दौरान भी मोदी ने जवानों की खूब सेवा की। युवावस्था में मोदी पर स्वामी विवेकानंद का बहुत गहरा प्रभाव पड़ा। उन्होंने स्वामी जी के कार्यों का गहराई से अध्ययन किया जिसने उन्हें जीवन के रहस्यों की खोज की तरफ आकर्षित किया और उनमें त्याग और देश भक्ति (Patriotism) की भावनाओं को नई उड़ान दी। उन्होंने स्वामी जी के भारत को विश्व गुरु बनाने के सपने को साकार करना अपने जीवन का मकसद बना लिया।

17 साल की उम्र में मोदी ने घर छोड़ दिया और अपनी आध्यात्मिक यात्रा (Spiritual journey) शुरू की। उन्होंने भारत के विभिन्न हिस्सों का भ्रमण किया। उन्होंने हिमालय में ऋषीकेश, बंगाल में रामकृष्ण आश्रम और पूर्वोत्तर भारत की यात्रा की और फिर दो वर्ष बाद वे घर लौट आए। इन यात्राओं से उन्हें स्वामी विवेकानंद को और गहराई से जानने का सौभाग्य मिला जिसने उन्हें पूरी तरह बदल दिया। जब वे घर लौटे, उनका मकसद साफ था- राष्ट्र की सेवा (Serving the Nation)। वे केवल दो सप्ताह ही घर पर रुके और फिर अहमदाबाद (Ahmedabad) के लिए निकल पड़े। वहाँ जाकर वे आर.एस.एस. (R.S.S.) के सदस्य बन गए। आर.एस.एस. (R.S.S.) एक ऐसा संगठन है जो देश  के सामाजिक, आर्थिक, और सांस्कृतिक विकास के लिए कार्य करता है।
1972 में मोदी आर.एस.एस. (R.S.S.) के प्रचारक बन गए और अपना सारा समय आर.एस.एस. (R.S.S.) को देने लगे। वे सुबह पाँच बजे उठ जाते और देर रात तक काम करते। इस व्यस्त दिनचर्या के बावजूद उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की और राजनीति विज्ञान में डिग्री हासिल की (Degree in political science)। प्रचारक होने के नाते मोदी ने गुजरात के विभिन्न हिस्सों का भ्रमण किया और लोगों की समस्याओं को करीब से समझा। 1975 में देश में जब आपातकाल (Emergency) के काले बादल छाए थे, तब आर.एस.एस. (R.S.S.) जैसी संस्थाओं पर प्रतिबंध लग गया था। फिर भी मोदी भेष बदलकर देश की सेवा करते रहे और सरकार की गलत नीतियों का जमकर विरोध किया। आर.एस.एस. (R.S.S.) में बेहतरीन काम की बदौलत उन्हें भाजपा (B.J.P.) में नियुक्त किया गया। Narendra Modi ने 1990 में आडवाणी की अयोध्या रथ यात्रा का भव्य आयोजन किया जिससे भाजपा (B.J.P.) के वरिष्ठ नेता काफी प्रभावित हुए। उनके अद्भुत कार्य की बदौलत भाजपा (B.J.P.) में उनका कद बढ़ता रहा।
2001 में Gujarat में भयानक भूकंप (Earthquake) आया और पूरे Gujarat में भारी विनाश हुआ। गुजरात सरकार के राहत कार्य से ना खुश होकर भाजपा (BJP) के वरिष्ठ नेताओं ने Narendra Modi को गुजरात का मुख्यमंत्री (Chief Minister of Guajart) बना दिया। मोदी ने काफी कुशलता से राहत कार्य संभाला और गुजरात को फिर से मज़बूत किया। मोदी ने गुजरात को भारत का सबसे बेहतरीन राज्य बना दिया। उन्होंने गाँव गाँव तक बिजली (Electricity) पहुँचाई। देश में पहली बार किसी राज्य की सभी नदियों को जोड़ा गया जिससे पूरे राज्य में पानी की कमी दूर हुई। एशिया के सबसे बड़े सोलर पार्क (Asia’s Largest Solar Park) का निर्माण Gujarat में हुआ। गुजरात के सभी गाँवों को इंटरनेट से जोड़ा गया और टूरिज़्म को भी बढ़ावा दिया गया (Tourism has also Promoted)। Modi के कार्यकाल में Gujarat में बेरोज़गारी काफी कम हुई (Unemployment Decreased) और महिलाओं की सुरक्षा में काफी मज़बूती आई। इन्ही कारणों की वजह से गुजरात की जनता ने मोदी को चार बार लगातार अपना मुख्यमंत्री (C.M.) नियुक्त किया।
Gujarat में Modi की सफलता देखकर भाजपा (B.J.P.) के बड़े नेताओं ने Modi को 2014 लोक सभा चुनावों का प्रधानमंत्री  उम्मीदवार (Prime Minister Candidate) घोषित किया। मोदी ने पूरे भारत में अनेक रैलियाँ की जिनमें हज़ारों लोग उन्हें सुनने आते थे। मोदी ने सोशल मीडिया (Social Media) का भी भरपूर लाभ उठाया और लाखों लोगों तक अपनी बात रखी। मोदी के गुजरात में विकासशील कार्य, उनके प्रेरणादायक भाषण (Inspirational Speech), देश के प्रति उनका प्यार, उनकी साधारण शुरुआत और उनकी  के कारण उन्हें भारी मात्रा में वोट मिले और वे भारत के पंद्रहवे प्रधानमंत्री बने (India ‘s Fifteenth Prime Minister)।
प्रधानमंत्री (P.M.) बनने के बाद वे भारत का कुशलता से नेतृत्व कर रहे हैं और भारत को नई उचाईओं पर पहुँचा रहे हैं। उन्होंने कई विदेश यात्राएँ की और भारत की छवि संपूर्ण विश्व में मज़बूत की। इसी कारण विदेशों द्वारा भारत में काफी निवेश हुआ। मोदी ने पड़ोसी देशों से भी काफी अच्छे संबंध बनाए। मोदी ने जन धन योजना (Jan Dhan Yojna), स्वच्छ भारत अभियान (Clean India Campaign), मेक इन इंडिया (Make in India) और डिजिटल इंडिया (Digital India) जैसी  कई योजनाओं की शुरुआत की जिससे India में काफी विकास (Development) हो रहा है ।
Narendra Modi बहुत ही मेहनती व्यक्ति हैं। वे 18 घंटे काम करते हैं और कुछ ही घंटे सोते हैं। वे शुद्ध शाकाहारी (Vegetarian) हैं और नवरात्रों के नौ दिन उपवास रखते हैं। मोदी अपनी सेहत का भरपूर ध्यान रखते हैं और प्रतिदिन योग (Yoga) करते हैं, भले ही वे कहीं भी हों। मोदी हमेशा साफ कपड़े पहनते हैं और लोग उन्हें फैशन आइकॉन के रूप में देखते हैं। नेता होने के अलावा मोदी एक कवि और लेखक भी हैं। वे अपने भाषणों से लाखों युवाओं का मनोबल बढ़ाते हैं और उनमें देश भक्ति की भावना जगाते हैं।
मोदी जी (Modi Biography) से हमें यह सीख मिलती है कि हमें हमेशा मेहनत करनी चाहिए और निस्वार्थ भाव से देश की सेवा करनी चाहिए। ये हमारे गणतंत्र की ताकत ही है जिसने एक चाय वाले को देश का प्रधानमंत्री (Prime Minister) बनने का अवसर दिया। उम्मीद है आप सभी को Narendra Modi के जीवन से प्रेरणा (Inspirational) मिलेगी और आप अपने सपने साकार करेंगे। मेरी आप सभी से यह विनती है कि हमें मोदी जी के भारत को विश्व गुरु बनाने के मिशन में उनका पूरा साथ देना चाहिए। 

Budget 2017

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के बीज बजट 2017-18 पेश किया। इस बजट में जेटली ने नोटबंदी की मार से जूझ रहे वेतनभोगी मध्यवर्ग और छोटे कारोबारियों को राहत देते हुए इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव किए हैं। अब तीन से पांच लाख रुपये तक की सालाना व्यक्तिगत आय वालों पर टैक्स की मौजूदा 10 प्रतिशत दर को घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया। इसके साथ ही 50 करोड़ रुपये तक का वार्षिक कारोबार करने वाली छोटी इकाइयों के लिए टैक्स की दर घटाकर 25 प्रतिशत कर दी।

इस बार के आम बजट में रेलवे बजट को भी मिलाया गया है। इस लिहाज से यह ऐतिहासिक बजट है। इसके साथ ही आमतौर पर फरवरी के अंत में बजट पेश किया जाता है लेकिन इस बार इसे फरवरी माह के शुरू में ही पेश किया गया।
टैक्स दरों में बदलाव
वित्त मंत्री ने टैक्स छूट के लिए न्यूनतम आय की सीमा को 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दिया है। इससे अब 3 लाख रुपये की वार्षिक आय पर कोई टैक्स नहीं लगाया जाएगा। तीन लाख से 5 लाख रुपये की सालाना आय पर टैक्स की दर 10 से घटाकर 5 प्रतिशत की गई। 50 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये सालाना कमाने वाले लोगों को 10 प्रतिशत का अधिभार देना होगा। एक करोड़ रुपये से अधिक की वार्षिक आय पर 15 प्रतिशत का अधिभार जारी रहेगा।
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बजट 2017: ममता बनर्जी ने बजट को बताया विवादास्पद, अनुपयोगी, आधारहीन, मिशनविहीन

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने आज बजट पेश कर दिया है. इस बजट का भ्रामक बताते हुए ममता बनर्जी ने दावा किया कि इसमें कोई रोडमैप नहीं है और यह केवल आंकड़ों और खोखले शब्दों की बाजीगरी है. ममता बनर्जी ने ट्वीट किया है कि, विवादास्पद बजट 2017 अनुपयोगी, आधारहीन, मिशनविहीन और क्रियाहीन है. सरकार की ओर से देश के लिए या भविष्य के लिए कोई रोडमैप नहीं रखा गया है और यह सरकार अपनी पूरी विश्वसनीयता खो चुकी है.

उन्होंने कहा, करदाताओं के लिए धन निकासी पर पाबंदी अब भी लागू हैं. तत्काल सारी पाबंदियां हटाई जाएं और नोटबंदी के आंकड़े कहां हैं? भ्रामक आंकड़ों और खोखले शब्दों की बाजीगरी से भरा जिसका कोई मलतब नहीं है. नोटबंदी के खिलाफ प्रदर्शन जारी रखते हुए तृणमूल कांग्रेस ने कल से शुरू हुए संसद के बजट सत्र के पहले दो दिन संसद में उपस्थित नहीं रहने का फैसला किया है.
पुद्दुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी ने कहा कि बजट ‘समग्र तरीके से, सक्रियता से काम कर रही सरकार का परिणाम है. उन्होंने ट्वीट किया, ‘भारत सुरक्षित हाथों में है और हम आभारी हैं. संसाधनों का इष्टतम उपयोग नए बजट की बुनियाद बन गया है. बेदी ने ट्विटर पर वित्त मंत्री अरुण जेटली को बधाई दी.

  गौरतलब है कि वित्तमंत्री अरुण जेटली ने आज बजट पेश करते हुए कहा कि हम नीतिगत प्रशासन की ओर बढ़े हैं. हमारा फोकस युवाओं की तरक्‍की पर है. पिछले ढाई सालों में शासन के तरीकों में बदलाव आया है.बजट में राजनीतिक दलों के चंदे पर अंकुश लगाने से जुड़ा अहम फैसला लिया गया है. राजनीतिक दल अब 2000 से ज्यादा का चंदा कैश में नहीं ले सकेंगे. वहीं 3 लाख रुपये से ज्यादा के नकद लेन-देन पर रोक लगा दी गई है. रेलवे में नई लाइनों के साथ सुरक्षा पर फोकस किया गया है, जिसके लिए 1 लाख करोड़ के बजट का प्रावधान है. यही नहीं IRCTC पर टिकट बुकिंग से सर्विस टैक्स हटा लिया गया है. मीडिल क्लास को राहत देते हुए अब 2.5 लाख से 5 लाख तक की आयकर सीमा 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई है.

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने आम बजट 2017-18 पेश किया

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने आम बजट 2017-18 में व्यक्तिगत आयकर की सबसे छोटी स्लैब को घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया, जिसका लाभ सिर्फ कम आय वालों को ही नहीं, ज़्यादा कमाने वालों तक भी पहुंचेगा, लेकिन वे टैक्स विशेषज्ञ निराश हैं, जिन्हें सेक्शन 80सी के तहत करमुक्त बचत सीमा में बढ़ोतरी की उम्मीद थी... 'टैक्समैन' के निदेशक राकेश भार्गव का कहना है, "इस बजट में (इनकम टैक्स एक्ट की) सेक्शन 80सी की सीमा को डेढ़ लाख से बढ़ाकर दो लाख रुपये किया जा सकता था, क्योंकि मौजूदा सीमा पीएफ, बीमा, ट्यूशन फीस जैसे सभी भुगतानों को कवर करने के लिए पर्याप्त नहीं है... इसके अलावा बच्चों के लिए पढ़ाई भत्ता, मेडिकल री-इम्बर्समेंट तथा होस्टल भत्ता जैसे कुछ भत्ते बहुत साल पहले निर्धारित किए गए थे, सो, इस बजट में उन्हें भी बढ़ाया जा सकता था...

नोटबंदी का असर झेल रहे उद्योग जगत ने वित्त मंत्री को एक लंबी वि-लिस्ट सौंपी थी. वित्त मंत्री ने छोटी कंपनियों के लिए टैक्स में राहत का एलान किया लेकिन बड़े उद्योगपतियों के लिए कुछ खास नहीं रहा.

इस बजट में किफायती आवासों को बुनियादी ढांचे का दर्जा दे दिया गया है, जिसकी लंबे समय से मांग हो रही है. रियल इस्टेट में काम करने वाले लोगों ने वित्त मंत्री के इस फैसले का स्वागत किया है. उन्हें उम्मीद है कि इससे इस क्षेत्र में एक नई क्रांति आएगी और हर किसी के घर का सपना अब आसानी से पूरा होगा.

लालू प्रसाद यादव ने बुधवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा पेश किए गए बजट को निराशापूर्ण बताते हुए इसकी आलोचना की है. लालू ने कहा कि यह बजट हताशापूर्ण है और इसमें कुछ भी नहीं है. उन्होंने सांसद ई. अहमद के निधन के दिन संसद में बजट पेश किए जाने की निंदा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के ट्रंप हैं.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा पेश किए गए बजट को केवल शेरो-शायरी वाला बजट करार देते हुए कहा कि इसमें कोई स्पष्ट दृष्टिकोण और सोच नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकार ने इस बजट में किसानों और युवाओं के रोजगार के लिए कुछ नहीं किया है.

बजट की समीक्षा करने का काम साल दर साल कठिन होता जा रहा है. बजट अब ठोस आंकड़ों की बजाए लंबे-लबे वाक्यों का रूप लेने लगा है. फिर भी ऐसा नहीं है कि बजट को एक नजर में देखा न जा सके.

भारत में गरीबी हटाने के लिए सबसे बड़ी योजनाओं में से एक मनरेगा को इस बजट में 48000 करोड़ रुपये के कोष का आवंटन किया गया है. यानी इस साल वित्तमंत्री अरुण जेटली ने साल 2017-18 के बजट में मनरेगा के लिए आवंटन 11 हजार करोड़ रुपए का इजाफा करते हुए इसे 48 हजार करोड़ रुपए कर दिया है. गौर करने लायक बात यह है कि मनरेगा की मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही आलोचना की थी.

वर्ष 2017-18 के लिए पेश आम बजट को आरबीआई के पूर्व गवर्नर सी. रंगराजन ने 'एक सामान्य बजट' बताते हुए कहा कि तीन प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य तक पहुंचने की रूपरेखा बदलने से राजकोषीय दायित्व एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) कानून का मजाक बनेगा.

पड़ोसी देशों की बढ़ती प्रतिद्वंद्विता को देखते हुए आम बजट में रक्षा क्षेत्र का खास ख्‍याल रखा गया है. इस बार के रक्षा बजट में 10 प्रतिशत से भी ज्‍यादा बढ़ोतरी कर भारत ने स्‍पष्‍ट कर दिया है कि सरहदों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी.

संघर्ष में आदमी अकेला होता है

1.संघर्ष में आदमी अकेला होता है,
सफलता में दुनिया उसके साथ होती है,
जिस-जिस पर ये जग हँसा है,
उसीने इतिहास रचा है…

2.चलता रहूँगा पथ पर,
चलने में माहिर बन जाऊंगा !!
या तो मंजिल मिल जाएगी,
या
अच्छा मुसाफ़िर बन जाऊंगा !!

3.लक्ष्य भी है, मंज़र भी है,
चुभता मुश्किलों का खंज़र भी है !!
प्यास भी है, आस भी है,
ख्वाबो का उलझा एहसास भी है !!

रहता भी है, सहता भी है,
बनकर दरिया सा बहता भी है!!
पाता भी है, खोता भी है,
लिपट लिपट कर रोता भी है !!

थकता भी है, चलता भी है,
कागज़ सा दुखो में गलत भी है !!
गिरता भी है, संभलता भी है,
सपने फिर नए बुनता भी है !!

THE UNIVERSE MODELS OF UNIVERSE

Geocentric Model   – The term “geocentric” means “earth–centered”. The geocentric model claimed that Earth was the center of the cosmos....